रिमोट काम ने सिर्फ़ आवागमन नहीं हटाया
रिमोट काम पर सामान्य बहस productivity, flexibility और commute के इर्द-गिर्द घूमती है। क्या लोग घर से उतना ही काम कर सकते हैं? क्या उन्हें यह पसंद है? क्या इसके बदले वे कम वेतन स्वीकार करेंगे? क्या कंपनियों को लोगों को फिर कार्यालय बुलाना चाहिए?
ये सभी वास्तविक सवाल हैं, लेकिन इनके पीछे एक शांत-सा कारक अक्सर छूट जाता है: साधारण सामाजिक संपर्क। कार्यालय सिर्फ़ काम करने की जगह नहीं होता। बहुत से लोगों के लिए वह छोटे, बिना किसी खास उद्देश्य वाले मानवीय संपर्क का स्रोत भी है — किसी के पास से गुजरना, लोगों के बीच खाना खाना, कोई छोटा सवाल पूछना, किसी बातचीत का हिस्सा सुन लेना, या बस ऐसे कमरे में होना जहाँ और लोग मौजूद हों।
एक नए Science शोधपत्र में Natalia Emanuel, Emma Harrington और Amanda Pallais ने अनुमान लगाया कि महामारी के बाद रिमोट काम बने रहने से क्या बदला। उनका निष्कर्ष यह नहीं है कि रिमोट काम हर व्यक्ति के लिए खराब है। निष्कर्ष यह है कि जिन नौकरियों को दूर से किया जा सकता था, वे काफी अधिक एकाकी हो गईं, और उन नौकरियों में मानसिक तनाव भी अधिक बढ़ा — खासकर अकेले रहने वाले लोगों में।
यह “रिमोट काम depression पैदा करता है” से अलग दावा है। अधिक संकीर्ण और उपयोगी बात यह है: काम की जगह हमारे दिन की सामाजिक बनावट बदल देती है।
अध्ययन ने क्या किया
लेखकों ने केवल उन लोगों की तुलना नहीं की जिन्होंने रिमोट काम चुना, उन लोगों से जो कार्यालय गए। ऐसी तुलना बहुत भ्रमित करने वाली होती, क्योंकि लोग अलग-अलग कारणों से खास नौकरियाँ, कंपनियाँ और काम की व्यवस्थाएँ चुनते हैं।
इसके बजाय उन्होंने उन occupations में काम करने वालों की तुलना की जिन्हें व्यवहारिक रूप से घर से किया जा सकता है, उन occupations से जिन्हें सामान्यतः शारीरिक उपस्थिति चाहिए। Software engineering और marketing रिमोट-योग्य कामों के उदाहरण हैं; nursing, food preparation और machine operation नहीं। यह वर्गीकरण Dingel–Neiman occupational remotability index पर आधारित है।
अध्ययन का design difference-in-differences है। शोधकर्ताओं ने पूछा कि महामारी के बाद isolation और mental health में बदलाव रिमोट-योग्य नौकरियों वाले लोगों में, nonremotable नौकरियों की तुलना में, अधिक हुआ या नहीं। उन्होंने 2011 से 2024 तक के पाँच nationally representative US surveys इस्तेमाल किए और मुख्य before–after तुलना से महामारी के चरम वर्ष 2020 और 2021 को बाहर रखा।
नमूना बड़ा है: संयुक्त datasets में 588,322 workers। Outcomes में time-use diaries, Kessler K-6 psychological distress score, depression, mental-health care का उपयोग और prescription medications शामिल हैं।
मुख्य बात यह है कि यहाँ “treatment” किसी व्यक्ति की रिमोट काम की पसंद नहीं है। Treatment ऐसी occupation में होना है जिसकी काम करने की व्यवस्था महामारी के बाद बाकी occupations की तुलना में बहुत अधिक बदल गई।
क्या बदला
रिमोट काम वास्तव में रिमोट-योग्य occupations में कहीं अधिक बढ़ा। 2024 तक ऐसे workers ने अपने 31.1% workdays पूरी तरह रिमोट बिताए, जबकि nonremotable occupations में यह अनुपात 8.9% था। महामारी के बाद दोनों समूहों के बीच वृद्धि का अंतर 17.9 percentage points था।
इसके साथ रिमोट-योग्य jobs में काम करने वालों ने nonremotable workers की तुलना में प्रति workday 1.2 अतिरिक्त काम-घंटे अकेले बिताए। शोधपत्र इसे 58.0% वृद्धि बताता है। यदि इस बदलाव को दोनों समूहों के बीच रिमोट काम में हुई अतिरिक्त वृद्धि के अनुपात से देखें, तो अनुमान निकलता है कि एक remote day पर लगभग 6.6 अतिरिक्त काम-घंटे अकेले बीतते हैं।
बदलाव सिर्फ़ काम के समय तक सीमित नहीं था। रिमोट-योग्य jobs वाले workers का कुल जागता समय, nonremotable workers की तुलना में, प्रति workday 1.1 घंटे अधिक अकेले बीता। शोधपत्र पूरे दिन अकेले बिताने के मामलों में वृद्धि और काम के बाद की सामाजिक गतिविधियों में कमी भी रिपोर्ट करता है।
यह हिस्सा आसानी से कम आँका जा सकता है। Commute अप्रिय हो सकता है। कार्यालय ध्यान भटका सकता है। लेकिन कार्यालय हटाने से कमजोर सामाजिक रिश्तों का एक स्वतः उपलब्ध स्रोत भी हट जाता है। जिन लोगों को घर या दूसरी जगहों पर पर्याप्त संपर्क मिलता है, उनके लिए शायद इसका असर कम हो। अकेले रहने वालों के लिए यह अंतर बहुत बड़ा हो सकता है।
अकेले रहने पर असर क्यों बढ़ता है
सबसे मजबूत प्रभाव उन workers में दिखे जो अकेले रहते हैं।
शोधपत्र के अनुसार अत्यधिक अकेलेपन के रूपों में वृद्धि इसी समूह में सबसे अधिक केंद्रित थी। रिमोट-योग्य occupations में अकेले रहने वाले workers में पूरे दिन अकेले बिताने की संभावना और ऐसे दिन बिताने की संभावना अधिक बढ़ी जिनमें gym, दुकान या restaurant जैसी सार्वजनिक जगहों पर भी कोई सहज सामाजिक संपर्क नहीं हुआ।
यह सहज रूप से समझ में आता है। यदि आप partner, बच्चों या परिवार के साथ रहते हैं, तो रिमोट काम सहकर्मियों का संपर्क कम कर सकता है, लेकिन घर का सामान्य मानवीय संपर्क बना रहता है। यदि आप अकेले रहते हैं, तो एक remote workday ऐसा पूरा दिन बन सकता है जिसमें कोई दूसरा व्यक्ति शारीरिक रूप से मौजूद ही न हो।
यही कारण है कि “रिमोट बनाम कार्यालय” बहुत मोटा विभाजन है। एक ही काम की व्यवस्था के सामाजिक परिणाम घर की संरचना, पड़ोस, commute, व्यक्तित्व, स्वास्थ्य, caregiving जिम्मेदारियों और इस बात पर निर्भर कर सकते हैं कि कार्यालय में आने के दिन दूसरे लोगों से मेल खाते हैं या नहीं।
मानसिक स्वास्थ्य के माप भी उसी दिशा में बदले
Mental-health measures में बदलाव isolation के बदलाव के साथ उसी दिशा में गया।
रिमोट-योग्य jobs वाले workers में nonremotable workers की तुलना में mental distress लगभग 0.1 standard deviations अधिक बढ़ा। Panel Study of Income Dynamics में K-6 distress score में 0.3 points की वृद्धि हुई, जबकि महामारी से पहले उसका औसत 3.0 था। अकेले रहने वाले workers में वृद्धि लगभग दोगुनी थी।
यह pattern केवल एक survey प्रश्न तक सीमित नहीं था। शोधपत्र depression, mental-health care के उपयोग और prescription medications में भी समान दिशा का बदलाव बताता है। रिमोट-योग्य jobs वाले workers के mental-health professional से मिलने की संभावना 4.6 percentage points बढ़ी, जबकि महामारी से पहले औसत 7.9% था। Depression या anxiety की prescriptions 10.9% के baseline से 1.8 points बढ़ीं; सभी mental-health prescriptions 11.6% से 1.9 points बढ़ीं।
Placebo checks यहाँ महत्वपूर्ण हैं। इन्हीं workers में non-mental-health care या non-mental-health prescriptions में समान वृद्धि नहीं दिखी। इससे परिणाम को केवल स्वास्थ्य सेवाओं के सामान्य बढ़े हुए उपयोग से समझाना कठिन हो जाता है।
लेखकों का अनुमान है कि अध्ययन अवधि में isolation और mental distress में कुल वृद्धि का लगभग एक तिहाई remote work के बढ़ने से जुड़ा हो सकता है। यह पर्याप्त बड़ा प्रभाव है, लेकिन पूरी कहानी नहीं।
यह क्या साबित नहीं करता
- यह नहीं साबित करता कि रिमोट काम हर किसी के लिए खराब है।
- यह नहीं साबित करता कि किसी खास व्यक्ति का distress इसलिए बढ़ा क्योंकि उसने व्यक्तिगत रूप से घर से काम चुना।
- यह कार्यालय में काम को अपने आप अधिक स्वस्थ नहीं साबित करता।
- यह fully remote और hybrid work को अलग-अलग साफ़ तौर पर नहीं मापता।
- यह उन हर subgroup की पहचान नहीं करता जिन्हें रिमोट काम से फायदा हो सकता है।
- यह loneliness को किसी पूर्ण validated loneliness या social-network scale से नहीं मापता; isolation measures उपलब्ध survey data से बनाए गए हैं।
- यह महामारी-काल के हर संभावित confound को खत्म नहीं करता। Design यह मानता है कि 2020–2021 हटाने के बाद remotable और nonremotable occupations अन्यथा समान trends का अनुसरण करते।
- यह यह नहीं कहता कि productivity, disability access, caregiving flexibility या commute time मायने नहीं रखते।
आखिरी बिंदु बहुत जरूरी है। रिमोट काम मूल्यवान हो सकता है। शोधपत्र स्वयं नोट करता है कि बहुत से workers remote या hybrid arrangement पसंद करते हैं, और दूसरे अध्ययनों में satisfaction, retention और work–life balance के फायदे मिले हैं। किसी सामाजिक लागत का होना पूरे arrangement पर अंतिम फैसला नहीं है।
प्रमाण कितना मजबूत है?
शोधपत्र की एक ताकत यह है कि वह किसी एक convenience survey पर निर्भर नहीं है। इसमें कई nationally representative US datasets से time-use data, mental-health scales, health-care use और prescription measures को जोड़ा गया है। Occupation-level design के कारण तुलना केवल उन लोगों के बीच नहीं है जिन्होंने रिमोट काम चुना और जिन्होंने नहीं चुना।
लेखकों ने कई robustness और placebo checks भी किए। प्रभाव अकेले रहने वालों में अधिक है — जैसा isolation mechanism से अपेक्षित होगा। Non-mental-health care में वही pattern नहीं मिलता। और उन्होंने यह भी जाँचा कि generative AI का exposure mental-health pattern समझा सकता है या नहीं; परिणाम AI exposure से ज्यादा occupation की remotability के साथ जुड़ते हैं।
कमजोरी sample size नहीं बल्कि interpretation है। “महामारी के बाद remotable occupation में होना” और “यह व्यक्ति सप्ताह में पाँच दिन घर से काम करता है” एक ही बात नहीं हैं। Estimates में hybrid arrangements, workplace spillovers, occupation-level बदलाव और ऐसे अनमापे shocks भी शामिल हो सकते हैं जिन्होंने remotable work को अलग तरह से प्रभावित किया हो।
इसलिए सबसे साफ निष्कर्ष यह है: अध्ययन गंभीर प्रमाण देता है कि महामारी के बाद remote work बढ़ने से isolation बढ़ा और mental-health measures खराब दिशा में गए, खासकर अकेले रहने वाले workers में। इसे किसी व्यक्ति के लिए सरल prescription की तरह नहीं पढ़ना चाहिए।
काम की व्यवस्था के लिए इसका अर्थ
व्यावहारिक निष्कर्ष “सबको कार्यालय वापस बुलाओ” नहीं है। अधिक उपयोगी निष्कर्ष है: रिमोट काम को ऐसे design मत कीजिए जैसे केवल location ही बदल रही हो।
यदि hybrid work में हर व्यक्ति अलग दिन कार्यालय आता है, तो कार्यालय मौजूद होकर भी सामाजिक रूप से खाली रह सकता है। यदि remote work में meetings तो हों लेकिन अनौपचारिक संपर्क न हो, तो दिन एक साथ efficient और isolating हो सकता है। और यदि कोई worker अकेला रहता है, तो पूरी तरह remote सप्ताह उसके रोजमर्रा के लगभग एकमात्र सुनिश्चित सामाजिक संपर्क को हटा सकता है।
लेखक hybrid workers के office days को coordinate करने और अनौपचारिक बातचीत को बढ़ावा देने जैसे उपायों की ओर इशारा करते हैं — ऑनलाइन भी। यह cubicles के लिए nostalgia नहीं है। यह मानना है कि सामाजिक संपर्क भी infrastructure है।
बेहतर सवाल “रिमोट या कार्यालय?” नहीं है। बेहतर सवाल है: पुरानी व्यवस्था कौन-से मानवीय संपर्क अनजाने में उपलब्ध कराती थी, और नई व्यवस्था उन्हें जानबूझकर कैसे उपलब्ध करा सकती है?
संक्षिप्त सार
Emanuel, Harrington और Pallais का अनुमान है कि महामारी के बाद remote work बढ़ने से workdays अधिक एकाकी हुए और mental-health measures में खराब बदलाव आए, खासकर अकेले रहने वाले लोगों में। Remotable occupations वाले workers ने nonremotable workers की तुलना में प्रति दिन लगभग 1.2 अतिरिक्त काम-घंटे अकेले और कुल जागते समय में 1.1 अतिरिक्त घंटे अकेले बिताए। Mental distress, mental-health care और mental-health prescriptions भी उन jobs में अधिक बढ़े, जबकि non-mental-health care में ऐसा pattern नहीं दिखा। यह remote work के खिलाफ blanket verdict नहीं है। यह design के लिए चेतावनी है: flexibility समय बचा सकती है और साथ ही सामाजिक संपर्क कम कर सकती है — और उस कमी का सबसे अधिक असर उन लोगों पर पड़ सकता है जिनके घर पहले से ही खाली हैं।
स्रोत
इस पर आधारित: Home alone: Remote work, isolation, and mental health — Natalia Emanuel, Emma Harrington and Amanda Pallais, Science 392, eaec7671 (2026).
संपादकीय टिप्पणी
यह लेख AI ने लिखा है और संपादकीय टीम ने इसकी समीक्षा की है। यह दिए गए शोध की स्पष्ट और सावधान व्याख्या है, मूल शोध-पत्र पढ़ने का विकल्प नहीं। चयन, व्याख्या और अंतिम शब्दावली की ज़िम्मेदारी संपादक की है।