एक सुर्खी जिसे दोबारा पढ़ना चाहिए
कुछ साल पहले एक चौंकाने वाला दावा बहुत फैला: प्रयोगों ने दिखा दिया है कि काल्पनिक संख्याएँ भौतिक रूप से वास्तविक हैं और क्वांटम यांत्रिकी उनके बिना लिखी ही नहीं जा सकती। यह दावा गंभीर और सावधान भौतिकी से निकला था—Marc-Olivier Renou और सहकर्मियों के 2021 के Nature प्रस्ताव और 2022 में उसे परखने वाले प्रयोगों से। लेकिन लोकप्रिय रूप में सटीक कथन एक नारे में बदल गया, और वह नारा वास्तविक परिणाम से अधिक मजबूत था।
Pedro Barrios Hita, Anton Trushechkin, Hermann Kampermann, Michael Epping और Dagmar Bruß का नया Physical Review Letters शोधपत्र इसी अंतर को साफ करता है। लेखक क्वांटम यांत्रिकी का ऐसा रूप बनाते हैं जो केवल वास्तविक संख्याओं का उपयोग करता है, फिर भी मानक जटिल-संख्या सिद्धांत की सभी भविष्यवाणियाँ दोहराता है—उन बहु-पक्षीय प्रयोगों की भी, जिन्हें वास्तविक-संख्या क्वांटम सिद्धांत को खारिज करने वाला माना गया था। तरकीब काल्पनिक संख्याओं को छिपाकर वापस लाने की नहीं है। बदली जाती है वह धारणा कि अलग-अलग प्रणालियों को एक संयुक्त प्रणाली में कैसे जोड़ा जाए। लेखकों का सावधान निष्कर्ष है: जटिल संख्याएँ क्वांटम यांत्रिकी के लिए अनिवार्य नहीं हैं, लेकिन वे बेहद उपयोगी हैं।
सिद्धांत में जटिल संख्याएँ क्या करती हैं
क्वांटम यांत्रिकी में किसी प्रणाली की अवस्था आयामों से व्यक्त की जाती है, और किसी परिणाम की संभावना आयाम के परिमाण के वर्ग से निकलती है। मानक सिद्धांत में ये आयाम जटिल संख्याएँ होते हैं: हर आयाम में परिमाण और एक चरण होता है। यह चरण कोई सजावटी गणित नहीं है। जब एक ही परिणाम तक पहुँचने वाले दो रास्ते जुड़ते हैं, तो उनके चरण तय करते हैं कि वे एक-दूसरे को मजबूत करेंगे या काटेंगे—यही व्यतिकरण का आधार है। दूसरी ओर, पूरी अवस्था पर समान रूप से लगाया गया वैश्विक चरण सीधे मापा नहीं जा सकता।
जटिल संख्या मूलतः दो वास्तविक संख्याओं—वास्तविक और काल्पनिक भाग—की जोड़ी है, लेकिन उनके गुणा करने के खास नियम भी होते हैं। इसलिए स्वाभाविक सवाल है: क्या यही पैकेज अनिवार्य है? क्या दो वास्तविक संख्याएँ अलग-अलग रखकर, जटिल-संख्या अंकन हटाकर, क्वांटम यांत्रिकी की सारी भविष्यवाणियाँ बचाई जा सकती हैं? कठिनाई केवल दो संख्याएँ रखने में नहीं, उनके बीच सही गणितीय संबंध बनाए रखने में है।
2021 के परिणाम ने वास्तव में क्या स्थापित किया
Renou और सहकर्मियों ने इसी प्रश्न का एक सटीक, परीक्षण-योग्य रूप पूछा। उन्होंने यह नहीं पूछा कि वास्तविक संख्याएँ क्वांटम सिद्धांत में कभी इस्तेमाल हो सकती हैं या नहीं। उन्होंने पूछा कि यदि संयुक्त प्रणालियों को बनाने के लिए मानक टेन्सर-गुणन नियम रखा जाए, तो क्या वास्तविक-संख्या क्वांटम यांत्रिकी जटिल सिद्धांत की सभी भविष्यवाणियाँ दोहरा सकती है। टेन्सर-गुणन नियम वह मानक गणितीय नुस्खा है जिससे कई स्वतंत्र हिस्सों को एक संयुक्त क्वांटम प्रणाली के रूप में लिखा जाता है।
उस नियम के तहत उन्हें तीन पक्षों और दो स्वतंत्र उलझाव-स्रोतों वाला ऐसा परिदृश्य मिला जिसमें वास्तविक-संख्या और जटिल-संख्या सिद्धांत अलग, मापने योग्य सहसंबंधों की भविष्यवाणी करते हैं—यह बहु-पक्षीय Bell परीक्षण का एक रूप है। 2022 में सुपरकंडक्टिंग सर्किट और फोटॉन का उपयोग करके ऐसे प्रयोग किए गए। मापे गए सहसंबंध जटिल क्वांटम यांत्रिकी से मेल खाते थे और उस खास वास्तविक-संख्या विकल्प से नहीं।
इस परीक्षण को एक नहीं, दो स्वतंत्र स्रोत क्यों चाहिए
सामान्य Bell परीक्षण में एक स्रोत उलझी हुई जोड़ी Alice और Bob को भेजता है। उस व्यवस्था में वास्तविक-संख्या क्वांटम यांत्रिकी ठीक वही सहसंबंध दोहरा सकती है जो जटिल सिद्धांत देता है; इसलिए एक स्रोत दोनों के बीच फैसला नहीं कर सकता।
2021 के तर्क में दूसरा, स्वतंत्र स्रोत जोड़ने से अंतर पैदा होता है। तीन पक्षों को एक पंक्ति में सोचें: Alice, Bob और Charlie। एक स्रोत Alice और Bob को जोड़ता है; दूसरा, स्वतंत्र स्रोत Bob और Charlie को। Bob बीच में अपने दोनों कणों का संयुक्त मापन करता है। दोनों स्रोतों की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है। मानक टेन्सर-गुणन नियम के साथ वास्तविक-संख्या सिद्धांत उस तीन-पक्षीय सहसंबंध को दोहरा नहीं पाता जिसकी भविष्यवाणी जटिल क्वांटम यांत्रिकी करती है। प्रयोग ने इसी अंतर को मापा।
यह साफ और वास्तविक परिणाम था। लेकिन तुलना किसके बीच हुई थी, यही निर्णायक बात है: मानक जटिल क्वांटम सिद्धांत और एक खास वास्तविक-संख्या सिद्धांत के बीच, जो सामान्य टेन्सर-गुणन नियम को बनाए रखता था। नया शोधपत्र quantum foundations की भाषा में उस खारिज किए गए विकल्प को foil theory कहता है—ऐसा तुलना-सिद्धांत जिसे जरूरी नहीं कि कोई प्रकृति का अंतिम सिद्धांत मानता हो; उसका काम यह दिखाना है कि किसी प्रयोग में कौन-सी धारणा निर्णायक है। उस foil को खारिज करने से यह पता चलता है कि उसके कौन-से नियम नहीं चल सकते। इससे वास्तविक संख्याएँ अपने-आप निषिद्ध नहीं हो जातीं।
नया शोधपत्र क्या बदलता है
नया काम लगभग सब कुछ बनाए रखता है और एक मूल मान्यता बदलता है। संयुक्त प्रणालियों के लिए टेन्सर-गुणन नियम को प्रारंभिक सिद्धांत मानने के बजाय लेखक स्थानीयता की एक आवश्यकता से शुरू करते हैं: यदि किसी एक उप-तंत्र पर अकेले कोई क्रिया की जाए, तो उससे दूसरे, अछूते उप-तंत्र पर मापने योग्य असर नहीं पड़ना चाहिए।
इस आधार से वे वास्तविक-संख्या क्वांटम यांत्रिकी का स्पष्ट निर्माण करते हैं। सामान्य जटिल आयामों के वास्तविक और काल्पनिक हिस्से अतिरिक्त वास्तविक संरचना के रूप में साथ चलते हैं; शोधपत्र इसे हर प्रणाली से जुड़ा एक “flag” कहता है। जटिल सिद्धांत का अप्रेक्षणीय वैश्विक चरण वास्तविक सिद्धांत में अप्रेक्षणीय घूर्णन बन जाता है। कीमत वहीं चुकानी पड़ती है जहाँ 2021 के परिणाम ने समस्या दिखाई थी: अलग प्रणालियों को संयुक्त प्रणाली में जोड़ने के नियम में।
यदि इन वास्तविक-संख्या वर्णनों को सीधे-सादे ढंग से जोड़ दिया जाए, तो एक सुसंगत नियम नहीं मिलता। इसलिए निर्माण उन वर्णनों को समतुल्य वर्गों में रखता है जो एक ही भौतिक अवस्था को दर्शाते हैं, और संयोजन का नियम उन्हीं वर्गों पर परिभाषित करता है। इस नियम के साथ वास्तविक-संख्या सिद्धांत जटिल सिद्धांत के हर प्रत्याशित मान को दोहरा देता है—एक प्रणाली के लिए भी और कई अलग, उलझी प्रणालियों के लिए भी। लेखक यह भी दिखाते हैं कि यह निर्माण मूलतः अद्वितीय है और मानक क्वांटम यांत्रिकी के समतुल्य है।
इसलिए बहु-पक्षीय प्रयोग इस नए वास्तविक-संख्या रूप और मानक जटिल रूप के बीच अंतर नहीं कर सकते: दोनों सभी भौतिक भविष्यवाणियों पर सहमत हैं। पहले के प्रयोग विफल नहीं हुए थे; वे बस एक अधिक प्रतिबंधित वास्तविक-संख्या सिद्धांत की जाँच कर रहे थे।
यह विरोधाभास क्यों नहीं है
इसे “2021 के प्रयोग गलत थे” कहना गलत होगा। वे प्रयोग सही थे, और नया शोधपत्र उनके मापे हुए सहसंबंधों को पूरी तरह स्वीकार करता है। संशोधन व्याख्या में है: “यह खास वास्तविक-संख्या सिद्धांत खारिज हुआ” से “क्वांटम यांत्रिकी में वास्तविक संख्याएँ असंभव हैं” तक की छलाँग में। उस छलाँग में एक महत्वपूर्ण धारणा—संयुक्त प्रणालियों के लिए चुना गया नियम—गायब हो गई थी।
शोधपत्र यह भी नहीं कहता कि हमें जटिल संख्याएँ छोड़ देनी चाहिए। उलटे, उसका निष्कर्ष दोनों बातों को साथ रखता है: वे सख्ती से अनिवार्य नहीं हैं, लेकिन अत्यंत उपयोगी हैं। वास्तविक-संख्या निर्माण में हर प्रणाली के साथ अतिरिक्त संरचना रखनी पड़ती है और प्रणालियों को जोड़ने का नियम अधिक जटिल हो जाता है। जटिल संख्याएँ यही सब एक साफ गणितीय पैकेज में समेट देती हैं। भौतिकी में अक्सर किसी औपचारिक ढाँचे के टिके रहने की यही पर्याप्त वजह होती है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
नीचे का असली प्रश्न यह है कि किसी भौतिक सिद्धांत में “अनिवार्य” का अर्थ क्या होता है। प्रयोग दो सिद्धांतों को अलग कर सकता है यदि उनकी भविष्यवाणियाँ अलग हों। लेकिन वह अपने-आप यह साबित नहीं कर सकता कि किसी विशेष गणितीय उपकरण के बिना वही भविष्यवाणियाँ किसी और तरह लिखी ही नहीं जा सकतीं। यह दूसरा प्रश्न वैकल्पिक सिद्धांतों के अस्तित्व का है, और उसका जवाब निर्माण से मिलता है, केवल मापन से नहीं। नया शोधपत्र ऐसा ही एक वैकल्पिक निर्माण सामने रखता है।
यह एक सामान्य भेद भी याद दिलाता है। “यह सिद्धांत खारिज हो गया” और “यह गणितीय उपकरण अपरिहार्य है” एक ही बात नहीं हैं। साफ प्रायोगिक परिणाम से बहुत बड़ा दार्शनिक निष्कर्ष निकालने पर यहीं गलती हो सकती है। जटिल संख्याएँ क्वांटम यांत्रिकी की स्वाभाविक और कुशल भाषा बनी रहती हैं। वे किसी गहरे अर्थ में अनिवार्य हैं या नहीं, यह अलग सवाल है—और इस शोधपत्र के अनुसार फिलहाल उत्तर ‘नहीं’ है।
संक्षेप में
2021 के प्रस्ताव और 2022 के प्रयोगों ने दिखाया था कि मानक टेन्सर-गुणन नियम पर बनी वास्तविक-संख्या क्वांटम यांत्रिकी कुछ बहु-पक्षीय परिस्थितियों में जटिल क्वांटम यांत्रिकी से अलग, परीक्षण-योग्य भविष्यवाणियाँ देती है, और प्रयोग जटिल सिद्धांत के पक्ष में गए। इसे अक्सर इस प्रमाण की तरह पेश किया गया कि काल्पनिक संख्याएँ भौतिक रूप से अनिवार्य हैं। नया Physical Review Letters शोधपत्र स्थानीयता पर आधारित अलग संयोजन-नियम के साथ वास्तविक-संख्या क्वांटम यांत्रिकी बनाता है, जो जटिल सिद्धांत की सभी भविष्यवाणियाँ—उन बहु-पक्षीय परीक्षणों सहित—दोहरा देती है। निष्कर्ष यह नहीं कि जटिल संख्याएँ बेकार हैं, बल्कि यह कि वे अत्यंत सुविधाजनक हैं, अनिवार्य नहीं। यह एक सैद्धांतिक निर्माण है; यह पहले के प्रयोगों को पलटता नहीं और व्यावहारिक क्वांटम यांत्रिकी को वास्तविक संख्याओं में दोबारा लिखने की मांग भी नहीं करता।
बिना बढ़ा-चढ़ाकर जाँच
शोधपत्र क्या दिखाता है: केवल वास्तविक संख्याओं का उपयोग करने वाला एक सुसंगत क्वांटम-यांत्रिकी ढाँचा मानक जटिल सिद्धांत की सभी भविष्यवाणियाँ, बहु-पक्षीय Bell-प्रकार के प्रयोगों सहित, दोहरा सकता है—यदि संयुक्त प्रणालियों के लिए मानक टेन्सर-गुणन नियम को मूल धारणा न मानकर स्थानीयता से नया संयोजन-नियम बनाया जाए।
क्या संभावित है लेकिन मुख्य बिंदु नहीं: यह 2021–2022 के परिणामों का खंडन नहीं है। वे प्रयोग सही थे; उन्होंने टेन्सर-गुणन नियम बनाए रखने वाले एक विशिष्ट वास्तविक-संख्या सिद्धांत को खारिज किया था, वास्तविक संख्याओं के हर संभव उपयोग को नहीं।
यह क्या नहीं दिखाता: जटिल संख्याएँ गलत, बेकार या व्यवहार में छोड़ देने लायक हैं। शोधपत्र उन्हें स्पष्ट रूप से बहुत उपयोगी मानता है। यह नया प्रयोग भी नहीं है; कोई नया भौतिक डेटा नहीं लिया गया। दावा गणितीय निर्माण और उसकी संगति पर है।
सामान्य पाठक के लिए मुख्य सीमा: तर्क इस चुनाव पर निर्भर करता है कि संयुक्त प्रणालियों के मानक टेन्सर-गुणन नियम और स्थानीयता की मांग में किसे अधिक बुनियादी माना जाए। यह quantum foundations की चलती बहस में एक सुविचारित विकल्प है, प्रयोग से तय हो चुका तथ्य नहीं। वास्तविक-संख्या रूप जटिल-संख्या रूप से कम स्वाभाविक भी लग सकता है।
कितना भरोसा? गणितीय निर्माण की आंतरिक संगति पर उच्च भरोसा। अधिक सावधान निष्कर्ष पर भी अच्छा भरोसा: जटिल संख्याएँ क्वांटम यांत्रिकी की बेहद सुविधाजनक भाषा हैं, लेकिन उनकी दार्शनिक अनिवार्यता सिद्ध नहीं है। “काल्पनिक संख्याएँ सचमुच भौतिक वस्तुएँ हैं” जैसी सुर्खी को उसी अतिशयोक्ति की तरह पढ़ना चाहिए जिसे यह काम ठीक कर रहा है।
स्रोत
इस पर आधारित: Quantum Mechanics Based on Real Numbers: A Consistent Description — Pedro Barrios Hita, Anton Trushechkin, Hermann Kampermann, Michael Epping, Dagmar Bruss, Physical Review Letters.
संपादकीय टिप्पणी
यह लेख AI ने लिखा है और संपादकीय टीम ने इसकी समीक्षा की है। यह दिए गए शोध की स्पष्ट और सावधान व्याख्या है, मूल शोध-पत्र पढ़ने का विकल्प नहीं। चयन, व्याख्या और अंतिम शब्दावली की ज़िम्मेदारी संपादक की है।